Friday, 3 June 2016

"शहर की लड़की" गाने पर हुई हड़ताल

पिचकपिक राजा बाबू की हलवाई की दुकान के लाउडस्पीकर  पर बज  रहे "शहर की लड़की" गाने ने शहर में हड़कंप मचा दिया है । सूत्रों के मुताबिक़ यह गाना शहर की लड़कियों का गलत चित्रण कर रहा है ।
"आँख लड़ाके पूछे , हाय हाउ डू यू डू 
हाथ मिलाके पूछे हाय हाउ डू यू डू " जैसी पंक्तियाँ ने लड़कियों के गुस्से को और भड़का दिया है 
शर्मीला जी, जो इस मोर्चे में शामिल हैं,का कहना है " मैं रोज़ बी.एम.टी.सी  से ऑफिस जाती हूँ ,पर मैं लैपटॉप के अलावा और कहीं नहीं देखती। मैं एक शहर की लड़की हूँ और मैं अपने नाम जैसी हूँ,एकदम शर्मीली"।
राजभवानी जी ने कहा ," मैं तो कैंडी क्रश में ही लगी रहती हूँ , कभी सर उठा के एक लड़के को नहीं देखा ।
मैं एक शहर की लड़की हूँ , मैं किसी लड़के को बेकार में हाय-हेलो नहीं करती । तब ही करती हूँ जब कैंडी क्रश  की लाइफ चाहिए हो "| मनीला जी का कहना है "सर , मैं तो वैनिला भी मोल भाव करके लेती हूँ । मैं शहर की लड़की हूँ और मुझे महंगी चीज़ें बिलकुल अच्छी नहीं लगती । नाम मेरा मनिला,मुझे नहीं बेचता कोई महंगा वैनिला"।
ज़ाहिर है की शहर की लड़कियाँ "सीधी बात ,नो बकवास में विश्वास रखती हैं "।
इस गाने के खिलाफ मोर्चा निकला जा रहा है और कहा जा रहा है कि जब तक सेंसर बोर्ड "शहर की लड़की" में से "शहर" को 'बीप' मतलब हटा नहीं देते तब तक ये मोर्चा यूँ ही चलेगा ।
शहर में हो रही इस हुड़दंग को रोकने का भरसक प्रयास किया जा रहा है।

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