Friday, 3 June 2016

ऑटोरिक्शा चालक ने तोडा "ना" बोलने का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड

बेंगलुरु के पक्या कुमार जी  जिनका ऑटो हमेशा "रंग दे तू मोहे गेरुआ" के शोर से भरपूर रहता है ,का दावा है कि उन्होंने अपने पूरे ऑटोरिकशा के करियर में करीब एक लाख बार ग्राहक को "ना" कहा है।
सुरेश नरेशन (२८) जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, इस बात के गवाह हैं । सुरेश जी का कहना है "सार, अम] इसको इत्ता बार बोलता चलने को, ऐ अमको अमेशा नो बोलता ! अम इसको एक बार थाईलैंड का फ्री टिकट भी दिया तो ऐ उसको भी नो बोला!"
पक्या कुमार जी की आदत इतनी गहरी है की वो रात में सिर्फ "ना  ना " करते हैं , जिसके कारण वो आज भी निःसंतान हैं ।
एक लाख बार "ना" कहने वाले पक्या कुमार जी अपनी तरह के एकमात्र ऑटोचालक हैं , जिस कारण उनका नाम "गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड" में दर्ज हो चुका है । अपने साथियों में वे एक आत्म-नियंत्रण के उदाहरण माने जा रहे हैं ।

"शहर की लड़की" गाने पर हुई हड़ताल

पिचकपिक राजा बाबू की हलवाई की दुकान के लाउडस्पीकर  पर बज  रहे "शहर की लड़की" गाने ने शहर में हड़कंप मचा दिया है । सूत्रों के मुताबिक़ यह गाना शहर की लड़कियों का गलत चित्रण कर रहा है ।
"आँख लड़ाके पूछे , हाय हाउ डू यू डू 
हाथ मिलाके पूछे हाय हाउ डू यू डू " जैसी पंक्तियाँ ने लड़कियों के गुस्से को और भड़का दिया है 
शर्मीला जी, जो इस मोर्चे में शामिल हैं,का कहना है " मैं रोज़ बी.एम.टी.सी  से ऑफिस जाती हूँ ,पर मैं लैपटॉप के अलावा और कहीं नहीं देखती। मैं एक शहर की लड़की हूँ और मैं अपने नाम जैसी हूँ,एकदम शर्मीली"।
राजभवानी जी ने कहा ," मैं तो कैंडी क्रश में ही लगी रहती हूँ , कभी सर उठा के एक लड़के को नहीं देखा ।
मैं एक शहर की लड़की हूँ , मैं किसी लड़के को बेकार में हाय-हेलो नहीं करती । तब ही करती हूँ जब कैंडी क्रश  की लाइफ चाहिए हो "| मनीला जी का कहना है "सर , मैं तो वैनिला भी मोल भाव करके लेती हूँ । मैं शहर की लड़की हूँ और मुझे महंगी चीज़ें बिलकुल अच्छी नहीं लगती । नाम मेरा मनिला,मुझे नहीं बेचता कोई महंगा वैनिला"।
ज़ाहिर है की शहर की लड़कियाँ "सीधी बात ,नो बकवास में विश्वास रखती हैं "।
इस गाने के खिलाफ मोर्चा निकला जा रहा है और कहा जा रहा है कि जब तक सेंसर बोर्ड "शहर की लड़की" में से "शहर" को 'बीप' मतलब हटा नहीं देते तब तक ये मोर्चा यूँ ही चलेगा ।
शहर में हो रही इस हुड़दंग को रोकने का भरसक प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल ही में ये बात सामने आई है की 'ग़दर ' की शूटिंग के दौरान जब सन्नी देओल जी ने हैंडपंप उखाड़ा था तब गली की औरतों ने उनकी झाड़ू और बेलन से जमकर धुलाई की थी ।
शबिरा बनो से जब पूछा गया कि उन्होंने क्यों इतना बड़ा कदम उठाया तो उनका कहना था "साब! हमार कु इधर पीने को पानी नहीं मिलता और ये पोट्टा चुपइच आकु हैंडपंप उखाड़रा ! आप इच बोलो , हमी क्या तमाशा देखने कु बैठे इधर?"
कैमरे के सामने बार-बार कूदने वाले बच्चे आज़म से जब पूछा गया तो उसने कहा, "सर मैं बतातुं आपको,
मैं टी.वी देख रा था तब अम्मी चिल्लाई 'ऐ आज़म ,ज़रा बेलन ले कु आ , कोन तो बी हौला हैंडपंप उखाड़ रा कत्ते', मैं भाग कु गया ! एक इच हैंडपंप है पूरी गल्ली में, वो बी उखाड़े तो कैसा होएंगा ? मैं तो अम्मी को बोला , हौर मारो अम्मी, खुन्दल खुन्दल के मारो इस पोट्टे को !"
जब धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी जी ने आकर लोगों को आश्वासन दिया कि वो उनके घर में "कैंट आर.ओ प्युरिफिेर" लगवाएंगे तो लोगों ने उनकी खूब खिल्ली उड़ाई कि "पानी नहीं पीने को, मैडम आई एडवर्टिसमेंट  करने को "।
मामला किसी तरह रफा-दफा कर दिया गया। सन्नी जी को काफी चोटें आई हैं । इस मामले पर सन्नी जी का बयान एकदम ग़ालिबाना है :

"निकालना खुल्द से आदम का सुनते आये थे ,
मगर लाहौर
बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले"