बेंगलुरु के पक्या कुमार जी जिनका ऑटो हमेशा "रंग दे तू मोहे गेरुआ" के
शोर से भरपूर रहता है ,का दावा है कि उन्होंने अपने पूरे ऑटोरिकशा के
करियर में करीब एक लाख बार ग्राहक को "ना" कहा है।
सुरेश नरेशन (२८) जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, इस बात के गवाह हैं । सुरेश जी का कहना है "सार, अम] इसको इत्ता बार बोलता चलने को, ऐ अमको अमेशा नो बोलता ! अम इसको एक बार थाईलैंड का फ्री टिकट भी दिया तो ऐ उसको भी नो बोला!"
पक्या कुमार जी की आदत इतनी गहरी है की वो रात में सिर्फ "ना ना " करते हैं , जिसके कारण वो आज भी निःसंतान हैं ।
एक लाख बार "ना" कहने वाले पक्या कुमार जी अपनी तरह के एकमात्र ऑटोचालक हैं , जिस कारण उनका नाम "गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड" में दर्ज हो चुका है । अपने साथियों में वे एक आत्म-नियंत्रण के उदाहरण माने जा रहे हैं ।
सुरेश नरेशन (२८) जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, इस बात के गवाह हैं । सुरेश जी का कहना है "सार, अम] इसको इत्ता बार बोलता चलने को, ऐ अमको अमेशा नो बोलता ! अम इसको एक बार थाईलैंड का फ्री टिकट भी दिया तो ऐ उसको भी नो बोला!"
पक्या कुमार जी की आदत इतनी गहरी है की वो रात में सिर्फ "ना ना " करते हैं , जिसके कारण वो आज भी निःसंतान हैं ।
एक लाख बार "ना" कहने वाले पक्या कुमार जी अपनी तरह के एकमात्र ऑटोचालक हैं , जिस कारण उनका नाम "गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड" में दर्ज हो चुका है । अपने साथियों में वे एक आत्म-नियंत्रण के उदाहरण माने जा रहे हैं ।
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